सावन के आखिरी सोमवार को घुश्मेश्वर महादेव के मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ सवाई माधोपुर  के शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर महादेव को देश के 12 ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है। सावन महोत्सव के दौरान 1 माह तक देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और घुश्मेश्वर मंदिर में अपनी हाजिरी लगाकर अपनी मनौती मांगते हैं । सावन महोत्सव के शुभारंभ होने से पूर्व मंदिर ट्रस्ट द्वारा समुचित तैयारियों को अंजाम दिया जा चुका है। श्रावण महोत्सव के दौरान 1 माह तक मंदिर ट्रस्ट की ओर से धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। सावन के आखिरी सोमवार को हजारों की तादाद में श्रद्धालु घुश्मेश्वर मंदिर पहुंचें। इस मंदिर का इतिहास भी अपने आप में बेहद अद्भुत है। घुश्मेश्वर मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो देव गिरी पर्वत के पास सुधर्मा नामक ब्राह्मण रहा करते थे। उनकी पत्नी थी सुधर्मा। लेकिन संतान सुख से वंचित रहने के कारण उन्हें लोगों के व्यंग्य बाण सुनने पड़ते थे । इससे व्यथित होकर सुधर्मा ने अपनी छोटी बहन सुषमा का विवाह करवाया। सुषमा भगवान शंकर की अनन्य भक्त थी। कुछ समय पश्चात घोषणा को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई ।लेकिन सुधर्मा को लगा कि पुत्र मोह के कारण उस का बहन के प्रति प्रेम कम होता जा रहा है तब सुधर्मा ने पुत्र की हत्या कर शव सरोवर में फेंक दिया । रक्तरंजित सैया को देखकर जब पुत्र वधू ने सास को बताया तो शिव की तपस्या की और आकाशवाणी से पता लगा कि वह उस ने ही हत्या की है। भगवान शिव ने सुधर्मा को खत्म करने की बात की तो सुषमा ने कहा कि नहीं प्रभु आप केवल उसकी बुद्धि सही कर दें। इस पर भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि आज से मैं तुम्हारे नाम से इसी स्थान पर बात करूंगा और लोगों की सेवा करूंगा।