Tonk - प्यार और रिश्ते

विभिन्न भाषाओं में ग़ज़ल पर सेमीनार का आयोजन राग़िब एकेडमी टोंक और अज़ीम प्रेमजी फाउण्डेषन के संयुक्त तत्वावधान में ’’ विभिन्न भाषाओं में ग़ज़ल की परम्परा’’ पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये डॉ. मनु शर्मा ने कहा कि ग़जल के विकास में अरब कबीलों के धुमक्कड़ जीवन के अनुभवों की झलक दिखाई देती है इसी कारण ग़ज़ल में ऩज्म की तरह एक ही विषय ना होकर ग़ज़ल का हर षेर एक अलग विषय की बात करता है। बीकानेर से आये डूंगर कॉलेज के प्रो0 मोहम्मद हुसैन ने बताया कि गज़ल का विकास सिर्फ़ अरब़ देषों से चलकर विभिन्न देषों की भाषाओं में इसका विकास हुआ है। डा0 अरशद अब्दुल हमीद ने ग़जल पर उठने वाले कुछ सवालों का विस्तार से जवाब दिया। अशोक आत्रेय ने कहा कि कला तो केवल कला होती है, हमें उसे विभिन्न भाषाओं व क्षेत्रों में बांट कर नहीं देखना चाहिए। लोकेश कुमार सिंह ’साहिल’ ने कहा कि ग़जल के माध्यम से आम जीवन की समस्याओं को विभिन्न शायरों ने उठाया है,लोकतांत्रितक मूल्यों के अनुसार ग़ज़ल का भी विकास हुआ है, ग़ज़ल अब आम लोगों से जुड़ने लगी है। सेमिनार के तकनीकी सत्र में सहायक प्रो. डॉ. शकीला बानो ने उर्द ग़ज़ल के अभी तक के विकास पर,क़ासिम बीकानेरी ने राजस्थानी ग़जल, इरशाद अ़जीज़ ने हिन्दी ग़ज़ल और मो. यासीन ने गुजराती ग़जल के विकास को लेकर पत्र वाचन किया।

सिंगर मनराज दिवाना। प्रियंका का आव ह हो जाका ह तारा फैरा म दीवाना। सिंगर हनुमान निमंली।रुला देगा यार